# इतिहास शिक्षण के शिक्षण सूत्र (Itihas Shikshan ke Shikshan Sutra)

शिक्षण कला में दक्षता प्राप्त करने के लिए विषयवस्तु के विस्तृत ज्ञान के साथ-साथ शिक्षण सिद्धान्तों का ज्ञान होना आवश्यक है। शिक्षण सिद्धान्तों के समुचित उपयोग के लिए मनोवैज्ञानिकों एवं शिक्षाशास्त्रियों, जैसे-कॉमेनियस (Comenious) और हरबर्ट स्पेन्सर (Herbert Spencer) आदि ने अपने अनुभवों के आधार पर शिक्षण के कुछ सामान्य नियम निर्धारित किए थे, ताकि शिक्षण … Read more

# छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय राजवंश | Chhattisgarh Ke Kshetriya Rajvansh

छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय/स्थानीय राजवंश : आधुनिक छत्तीसगढ़ प्राचीनकाल में दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता था। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में दक्षिण कोसल के शासकों का नाम वर्णित है। छत्तीसगढ़ भू-भाग किसी समय सभ्यता एवं संस्कृति का पुनीत केन्द्र था, इस बात का प्रमाण यहाँ की विभिन्न गुफाओं, शैलचित्रों एवं पाषाण युगीन प्राप्त शवाधोना आदि … Read more

# भारतीय संविधान की प्रस्तावना | Bhartiya Samvidhan ki Prastavana

भारतीय संविधान की प्रस्तावना : प्रस्तावना, भारतीय संविधान की भूमिका की भाँति है, जिसमें संविधान के आदर्शो, उद्देश्यों, सरकार के संविधान के स्त्रोत से संबधित प्रावधान और संविधान के लागू होने की तिथि आदि का संक्षेप में उल्लेख है। संविधान सभा ने इसे 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया। जो कि इस प्रकार … Read more

# वैष्णव धर्म : छत्तीसगढ़ इतिहास | Vaishnavism in Chhattisgarh in Hindi

छत्तीसगढ़ में वैष्णव धर्म : छत्तीसगढ़ में वैष्णव धर्म के प्राचीन प्रमाण ईसा की पहली और दूसरी सदी में पाए जाते हैं। बिलासपुर के मल्हार नामक स्थान में विष्णु प्रतिमा मिली है जो दूसरी सदी के आसपास की है। विद्वानों के अनुसार यह विष्णु के हरिहररूप की प्रतिमा है। बूढ़ीखार से प्राप्त विष्णु प्रतिमा में … Read more

# छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पृष्ठभुमि | Cultural background of Chhattisgarh in Hindi

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पृष्ठभुमि/धरोहर : लगभगग 700 वर्षों (ई. 6वीं सदी से 14वीं सदी) का काल छत्तीसगढ़ के इतिहास का एक ऐसा चरण रहा है, जब इस अंचल में अनेक राजवंशों ने शासन किया, यथा – शरभपुरीय, पाण्डुवंशी, नलवंश, नागवंश, राजर्षितुल्य कुल आदि राजवंशों ने अपने विविध भूमिकाएं प्रस्तुत की। इन राजवंशों द्वारा अपनी पृथक … Read more

# छत्तीसगढ़ में शैव धर्म का प्रभाव | Influence of Shaivism in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में शैव धर्म का प्रभाव : छत्तीसगढ़ क्षेत्र आदिकाल से ही सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। शैव धर्म छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक प्राचीन धर्म माना जाता है। इस अंचल में शैव धर्म सर्वाधिक लोकप्रिय तथा व्यापक स्वरूप में दिखाई देता है। किसी भी धर्म को प्रगति प्रदान करने और जनप्रिय बनाने … Read more