# मैक्स वेबर के सामाजिक स्तरीकरण का सिद्धान्त | Maxweber’s Theory of Social Stratification

मैक्स वेबर के सामाजिक स्तरीकरण के सिद्धान्त

मैक्स वेबर ने अपने सामाजिक स्तरीकरण के सिद्धान्त में “कार्ल मार्क्स के सामाजिक स्तरीकरण सिद्धान्त” की कमियों को दूर करने का प्रयास किया है तथा सामाजिक स्तरीकरण की विवेचना वेबर ने शक्ति (Power) के आधार पर की है। मैक्स वेबर का कथन है कि “समाज में पाई जाने वाली असमान शक्ति की एक संगठित अभिव्यक्ति सामाजिक स्तरीकरण है।” इससे स्पष्ट होता है कि समाज के सभी सदस्यों में शक्ति का बँटवारा समान रूप से न होकर असमान रूप से होता है अर्थात् किसी को कम शक्ति (Power) और किसी को अधिक शक्ति (Power) प्राप्त होती है। समाज में समान शक्ति वाले व्यक्तियों के समूह को वर्ग कहा जाता है। भिन्न-भिन्न वर्गों में शक्ति का विभाजन जिस रूप में होता है। उसी के अनुसार समाज में सामाजिक स्तरीकरण या ऊँच-नीच का संस्तरण उत्पन्न हो जाता है। मैक्स वेबर का सामाजिक स्तरीकरण का यही सिद्धान्त है।
मैक्स वेबर का सामाजिक स्तरीकरण सिद्धान्त | मैक्स वेबर के सामाजिक स्तरीकरण के सिद्धांत | Maxweber Ke Samajik Starikaran Ke Siddhant | #digicgvision
शक्ति के सम्बन्ध में मैक्स वेबर का कथन है कि “शक्ति से हमारा तात्पर्य उस अवसर से है जिसको एक व्यक्ति या अनेक व्यक्ति अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए किसी सामूहिक क्रिया में भाग लेने दूसरे व्यक्तियों द्वारा विरोध करने पर भी प्राप्त कर लेते हैं।” मैक्स वेबर की यह मान्यता है कि जिस प्रकार से सामाजिक प्रतिष्ठा किसी समुदाय के विशेष समूहों में विभक्त रहती है उसी प्रकार से उसके अनुरूप ही सामाजिक स्तरीकरण का निर्धारण होता है।

सामाजिक स्तरीकरण के प्रकार

मैक्स वेबर ने संस्थात्मक रूप से तीन प्रकार की शक्तियों को स्पष्ट किया है- आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक शक्ति। इन शक्तियों के आधार पर आर्थिक, सामाजिक तथा राजनैतिक क्षेत्र में सामाजिक स्तरीकरण को मैक्स वेबर ने निम्न प्रकार से स्पष्ट किया है।

(1) आर्थिक क्षेत्र में स्तरीकरण-

मैक्स वेबर ने आर्थिक क्षेत्र में सामाजिक स्तरीकरण को आर्थिक शक्ति के वितरण के अनुसार बतलाया है। समान आर्थिक हितों तथा समान आर्थिक शक्ति वाले व्यक्ति अपने एक वर्ग का निर्माण करते हैं जिनमें उच्चता तथा निम्नता का अन्य वर्गों के साथ संस्तरण होता है। मैक्स वेबर इस बात से सहमत हैं कि आर्थिक आधार पर समाज को दो प्रमुख वर्ग में विभक्त किया जा सकता है- पूँजीपति वर्ग अर्थात् जिसके पास सम्पत्ति हो तथा सम्पत्ति की शक्ति का अधिकारी हो और दूसरा सम्पत्तिविहीन वर्ग जो सेवा कार्य में संलग्न रहता है। किन्तु मैक्स वेबर ने इसके आगे भी इन वर्गों में भी विभिन्न आधार पर वर्ग विभाजन करके स्तरीकरण को स्पष्ट किया है। जैसे सम्पत्ति के प्रकार पर वर्ग विभाजन इसके अन्तर्गत जमींदार वर्ग, उद्योगपति वर्ग आदि प्रकार के वर्ग निर्मित होते हैं। इसी प्रकार सेवाओं के प्रकार के आधार पर वर्ग विभाजन के अन्तर्गत जो जिस प्रकार कार्य या सेवा करता है, उसके अनुसार उनका वर्ग निर्मित होता है; जैसे-शिक्षित वर्ग, लिपिक वर्ग, डॉक्टर वर्ग, वकील वर्ग आदि।
इस प्रकार मैक्स वेबर, मार्क्स के दो वर्ग की धारणा को नहीं मानता और उपर्युक्त प्रकार से समाज में अनेक वर्गों के अस्तित्व को स्वीकार करता है। अतएव स्पष्ट है कि समाज में आर्थिक शक्ति के आधार पर दो ही वर्ग नहीं बल्कि दो से अधिक वर्ग पाए जाते हैं जिनकी स्थिति समान न होकर असमान होती है तथा इनमें आपस में उच्च और निम्न का संस्तरण पाया जाता है। इस प्रकार मैक्स वेबर के अनुसार आर्थिक क्षेत्र में सामाजिक स्तरीकरण होता है।

(2) सामाजिक क्षेत्र में स्तरीकरण-

मैक्स वेबर ने सामाजिक क्षेत्र में सामाजिक प्रस्थिति में सामाजिक स्तरीकरण का आधार माना है। समाज में जो व्यक्ति एक समान सामाजिक प्रतिष्ठा, समान मान तथा समान सामाजिक स्थिति रखते हैं वे सभी एक ही प्रस्थिति समूह (Status Group) के सदस्य होते हैं। सामाजिक संरचना के अन्तर्गत प्रत्येक प्रस्थिति समूह का अपना-अपना अलग-अलग स्थान निर्धारित होता है जिसका निर्धारण समाज तथा समुदाय के द्वारा किया जाता है। समाज के द्वारा ही यह निश्चित किया जाता है कि कौन-से प्रस्थिति समूह को उच्च माना जायेगा तथा कौन-से प्रस्थिति समूह को निम्न माना जायेगा। इस प्रकार सामाजिक संरचना के अन्तर्गत समाज या समुदाय के निर्देशानुसार विभिन्न प्रस्थिति समूह उच्च और निम्न के एक संस्तरण में स्थित हो जाते हैं। इस प्रकार सामाजिक प्रस्थिति के आधार पर सामाजिक क्षेत्र में सामाजिक स्तरीकरण होता है।

(3) राजनैतिक क्षेत्र में स्तरीकरण-

राजनैतिक क्षेत्र में किसी व्यक्ति की प्रस्थिति उसकी राजनैतिक शक्ति के आधार पर निर्धारित होती है तथा राजनैतिक शक्ति का प्राप्त होना उस राजनैतिक दल पर निर्भर करता है जिस दल का व्यक्ति सदस्य होता है। यदि कोई व्यक्ति उस राजनैतिक दल का सदस्य होता है जिसकी सत्ता होती है तो वह अधिक शक्तिशाली होगा तथा उसकी समाज में उच्च प्रस्थिति होगी और यदि व्यक्ति उस राजनैतिक दल का सदस्य होता है जिसकी सत्ता नहीं होती तो समाज में उसकी प्रस्थिति राजनैतिक क्षेत्र में निम्न होती है। इस प्रकार राजनैतिक क्षेत्र में राजनैतिक शक्ति के आधार पर व्यक्ति या समूह की प्रस्थिति का निर्धारण होता है और उसी के अनुरूप राजनैतिक क्षेत्र में सामाजिक स्तरीकरण होता है तथा ऊँच-नीच का सामाजिक संस्तरण पाया जाता है।
मैक्स वेबर के अनुसार उपर्युक्त प्रकार से समाज में शक्ति के आधार पर आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक शक्तियों के द्वारा आर्थिक, सामाजिक तथा राजनैतिक क्षेत्र में सामाजिक स्तरीकरण होता है तथा शक्तियों के आधार पर ही इनमें विभिन्न क्षेत्रों में प्रस्थिति समूह तथा व्यक्तियों में उच्चता-निम्नता का एक संस्तरण पाया जाता है।
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