# शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण : संवैधानिक स्थिति

शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण : हाब्स कहते हैं, ज्ञान ही शक्ति है, (नालेज इन पावर) शिक्षा के माध्यम से ही मनुष्य अपनी दैहिक,…

# मौलिक अधिकारों की संवैधानिक स्थिति (पृष्ठभूमि) | Constitutional Status of Fundamental Rights

मौलिक अधिकारों की संवैधानिक स्थिति (पृष्ठभूमि) : भारत के संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों को देश की सर्वोच्च विधि द्वारा संरक्षित हित के…

# वैष्णव धर्म का उद्भव और विकास

वैष्णव धर्म का उद्भव और विकास वैदिक काल में भारतीय धर्म का स्वरूप भिन्न भिन्न रूप में प्रस्तुत हुआ है। आर्यों ने देवत्व…

# मूल अधिकारों में संशोधन (Amendment of fundamental rights)

मूल अधिकारों में संशोधन : मूल अधिकार राज्य के विरूद्ध प्रदत्त है अतः इसके कारण व्यवस्थापिका से मतभेद चलता रहा है। सर्वोच्च न्यायालय…

# क्या भारत एक राष्ट्र है समझाइए ?

क्या भारत एक राष्ट्र है? अनेक बार इस आशय के प्रश्न किये जाते हैं कि भारत को एक राष्ट्र कहा जा सकता है…

# अनुसूचित जाति का क्या मतलब है? | Anusuchit Jati Kise Kahte Hai?

भारतीय समाज में अनेक प्रकार की सामाजिक, आर्थिक, असमानताएँ प्राचीन काल से व्याप्त रही हैं, इनमें सर्वाधिक निम्नस्तरीय असमानताएँ वर्ण व्यवस्था पर आधारित…

# “राज्य का आधार इच्छा है, शक्ति नहीं” इस कथन की व्याख्या कीजिए

राज्य का आधार इच्छा है शक्ति नहीं : “The basis of the state is will, not power.” – T.H. Green व्यक्तिवादी, साम्यवादी, अराजकतावादी…

# नीति निदेशक सिद्धान्त : संवैधानिक स्थिति – एक विश्लेषण

संवैधानिक स्थिति – एक विश्लेषण : “राज्य के नीति निदेशक सिद्धान्त यद्यपि कोई वैधानिक आधार प्रदान नहीं करते और न ही संवैधानिक उपचार…

# मैकियावेली को आधुनिक राजनीतिक विचारक क्यों कहा जाता है? आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए | Aadhunik Rajnitik Vichark

आधुनिक राजनीतिक विचारक : मैकियावेली राजनीतिक दर्शन में मैकियावेली को “अपने युग का शिशु” कहने के साथ-साथ “आधुनिक युग का जनक” भी कहा…

# कार्ल मार्क्स के अतिरिक्त मूल्य सिद्धान्त | Karl Marx’s Theory of Surplus Value

कार्ल मार्क्स के “अतिरिक्त मूल्य के सिद्धान्त” : कार्ल मार्क्स के सामान्य दर्शन पर उसके विचारों को चार वर्गों में विभक्त किया जा…