# समुदाय का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं | Samuday Ka Arth, Paribhasha, Visheshata

अरस्तू का कथन है कि मानव एक सामाजिक प्राणी है, जो सार्वभौमिक सत्य है क्योंकि मानव जाति के बिना न तो समाज का ही उद्भव हो सकता है और न ही समाज से अलग मानव के अस्तित्व की ही कल्पना की जा सकती है। मानव अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति अन्य व्यक्तियों के सहयोग के बिना नहीं कर सकता है। समाज के सभी सदस्य अपनी विशेष योग्यताओं तथा आवश्यकताओं के कारण एक दूसरे से भिन्न होते हैं। इन्हीं आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु वह एक दूसरे पर आश्रित भी होते है। इसीलिये समाज में अनेकता में एकता दिखाई पड़ती है। समाज का कोई भी सदस्य अकेले अपनी तथा अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति स्वतः के प्रयास से नहीं कर सकता, इसके लिये वह समाज के अन्य सदस्यों से सहयोग भी प्राप्त करता है।

आधुनिकीकरण, औद्योगिकीकरण व शहरीकरण आदि के कारण प्रत्येक व्यक्ति विशेषीकरणयुक्त होता जा रहा है किन्तु प्रत्येक व्यक्ति केवल अपने व्यवसाय में ही विशेषज्ञ हो रहा है न कि प्रत्येक व्यवसाय के फलस्वरूप अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये अन्य व्यक्तियों पर आश्रित होता चला जा रहा है।

मानव जीवन में एक साथ एक निश्चित भू-भाग में रहने की अपनी आदत के कारण एक-दूसरे पर निर्भरता बनी हुयी है क्योंकि मानव को जब यह महसूस होने लगा कि अकेले रहकर आवश्यकताओं की पूर्ति सम्भव नहीं है तो अलग-अलग रहने के स्थान पर वह एक साथ रहने लगे। उन्हें यह विश्वास होने लगा कि समूह में रहने से एक तो उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से हो जायेगी साथ ही दूसरी ओर बाहरी शक्तियों से समूह में रहकर आसानी से उनका मुकाबला किया जा सकता है। फलस्वरूप एक साथ रहने से सामुदायिक भावना विकसित होगी और समूह के लोगों को अपनी जिम्मेदारी को बढ़ावा मिलेगा।

समुदाय का अभिप्राय साधारण शब्दों में मुख्य रूप से किसी विशिष्ट धर्म, जाति, सम्प्रदाय आदि से लगाया जाता है। उदाहरण के तौर पर हिन्दू समुदाय, मुस्लिम समुदाय, जैन समुदाय, ग्रामीण अथवा नगरीय समुदाय इत्यादि जो कि इसके संकुचित स्वरूप को दर्शाता है। वहीं व्यापक अर्थों में समुदाय से आशय किसी ग्राम, नगर, कस्बे अथवा देश आदि से लगाया जाता है जो किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ होता है तथा वहां की विशिष्टताओं को प्रदर्शित करता है।

समुदाय का अर्थ :

समुदाय शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘Com‘ और ‘Munis‘ शब्द से हुयी है। यहां ‘Com’ का अर्थ है ‘Together’ अर्थात ‘एक साथ’ तथा ‘Munis’ का अर्थ है ‘Serving’ अर्थात ‘सेवा करना’। स्पष्ट है –

  • Com‘ अर्थात् ‘एक साथ’
  • Munis‘ अर्थात् ‘सेवा करना’
  • Community‘ अर्थात् ‘एकसाथ मिलकर सेवा करना’

इस प्रकार समुदाय का अर्थ है एक साथ मिलकर सेवा करना। स्पष्ट है कि समुदाय का विकास एक निश्चित भू-भाग में रहने के कारण ही सम्भव हुआ। इतने बड़े समाज में प्रत्येक व्यक्ति के साथ रहकर सेवा करना सम्भव नहीं है। इसलिये मनुष्य एक निश्चित भू-भाग में, अपने आस-पड़ोस में रहने वाले व्यक्तियों के साथ ही सम्बन्धों की स्थापना करता है तथा उन्हीं के साथ अपना जीवन व्यतीत करता है।

समुदाय की परिभाषाएं :

समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से समुदाय की निम्नलिखित परिभाषाएं हैं –

मैकाइवर के अनुसार “समुदाय सामाजिक जीवन के उस क्षेत्र को कहते हैं, जिसे सामाजिक सम्बद्धता अथवा सामंजस्य का कुछ मात्रा द्वारा पहचाना जा सके।”

“Community is an area of social living marked by some degree of social coherence.” – Maclver

ऑसबर्न तथा ब्लूमेसर के अनुसार– “समुदाय व्यक्तियों का एक समूह है जो एक सन्निकट भौगोलिक क्षेत्र में रहता हो, जिसकी गतिविधियों एवं हितों के सामान्य केन्द्र हों तथा जो जीवन के प्रमुख कार्यो में इकट्ठे मिलकर कार्य करते हों।”

“Community is a group of people living in a contiguous geographic area, having common centres of interests and activities and functioning together in the chief concerns of life.” – Osburn and Neumeyer

जिन्सबर्ग के अनुसार “समुदाय सामाजिक प्राणियों का एक समूह है, जो सामान्य जीवन व्यतीत करते हैं, जिसमें सम्बन्धों के अनेक प्रकार और जटिलतायें होती हैं, जो सामान्य जीवन के कारण उत्पन्न होते हैं अथवा जो इसका निर्माण करतें हैं।”

“Community is a group of social beings living a common life including all the infinite variety and complexity of relations which result from that common life or constitute it.” – Ginsberg

सदरलैण्ड के अनुसार – “समुदाय एक सामाजिक क्षेत्र है जिस पर रहने वाले लोग सामान्य भाषा का प्रयोग करतें हैं, समान रूढ़ियों का पालन करतें हैं, न्यूनाधिक समान भावनायें रखतें हैं तथा समान प्रवृत्तियों के अनुसार कार्य करतें हैं।”

“A Community is a local area over which people are using the same language, comprising to the same moves, feeling more or less the same sentiments and acting upon the same attitudes.” – Sutherland

ऑगबर्न तथा निमकॉफ के अनुसार – “समुदाय किसी सीमित क्षेत्र के भीतर सामाजिक जीवन का पूर्ण संगठन है।”

“Community is the total organization of social life with a limited area.” – Ogburn and Nimkoff

बोगार्डस् के अनुसार – “समुदाय एक सामाजिक समूह है जिसमें हम भावना की कुछ मात्रा हो तथा जो एक निश्चित क्षेत्र में रहता हो।”

“Community is a social group with some degree of we feeling and living in a given area.” – Bogardus

प्रो० डेविस के अनुसार – “समुदाय लघुतम प्रादेशिक समूह है जो सामाजिक जीवन के सभी पक्षों का आलिंगन करता है।”

“Community is the smallest territorial group that can embrace all aspects of social life.” – prof. Davis

एच०टी० मजूमदार के अनुसार – “समुदाय किसी निश्चित भू-क्षेत्र क्षेत्र की सीमा कुछ भी हो पर रहने वाले व्यक्तियों का समूह है जो सामान्य जीवन व्यतीत करतें हैं।”

“Community comprises the entire group sympathetically entering in to a common life within a given area regardless of the extent of area or State boundaries.” – H. T. Majumdar

ग्रीन के अनुसार – “समुदाय व्यक्तियों का समूह है जो समीपस्थ छोटे क्षेत्र में निवास करते तथा सामान्य जीवन व्यतीत करते हैं।”

“A Community is a cluster of people, living within a continuous small area, who share a common way of life.” – Green

जी०डी०एच०कोल के अनुसार – “समुदाय से मेरा अभिप्राय सामाजिक जीवन के एक जटिल संरूप से है, ऐसे संरूप से जिसमें अनेक मानव प्राणी सम्मिलित हैं, जो सामाजिक संबंधों की परिस्थितियों के अंतर्गत रहतें हैं, जो सामान्य यद्यपि परिवर्तनशील रीतियों, प्रथाओं एवं प्रचलनों द्वारा परस्पर संबद्ध है तथा कुछ सीमा तक सामान्य सामाजिक उद्देश्यों एवं हितों के प्रति जागरूक हैं।”

“By Community I mean a complex of social life, a complex including a number of human beings, living together under conditions of social relationships, bound together by a common, however constantly changing stocks of communications, customs and traditions and conscious to some extent of common social objects and interests.” – G.D.H. Coal

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर हम यह कह सकते है कि समुदाय एक निश्चित भू–क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों का ऐसा समूह है जो आपसी तालमेल एवं सहयोग के कारण ‘हम‘ भाव की प्रबलता, समान प्रथाओं, रीति-रिवाजों एवं प्रचलनों के द्वारा एक-दूसरे के साथ जुड़े हुये हैं।

समुदाय की विशेषताएं :

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर समुदाय की विशेषताओं को निम्नलिखित प्रकार से अभिव्यक्त किया जा सकता है –

1. निश्चित भू–भाग

निश्चित भू-भाग का आशय निश्चित भौगोलिक क्षेत्र/सीमा अथवा घेरे से है जिसमें किसी विशेष सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, सांस्कृतिक विशेषताओं वाले नागरिक निवास करते हैं अथवा सम्मिलित होते हैं। मानव जाति में एक प्रवृत्ति पूर्व से ही दृष्टिगोचर है कि वह मूल रूप से निवास के लिये उसी स्थान को प्राथमिकता देता है जहां उसके समान सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक विचारों वाले लोग रहते हैं अर्थात् मानव जाति अथवा मानव परिवार ऐसे स्थान को ही निवास हेतु प्राथमिकता देता है जहां उसके सदृश्य लोग निवासित हों।

स्पष्ट है कि कई परिवार अपने से समान विशेषता वाले परिवारों के निकट आकर बसते जाते हैं। इस निश्चित भू-भाग में बसे परिवारों को उनकी समानता एवं निकटता के आधार पर इसे एक विशिष्ट नाम दिया जाता है जो उस पूरे क्षेत्र/समुदाय का परिचायक हो जाता है। समुदाय के इस निश्चित भू-भाग में बसने के आधार पर ही प्रशासन द्वारा सामाजिक-आर्थिक विकास की योजनायें निर्धारित की जाती है।

2. व्यक्तियों का समूह

किसी भी समाज की कल्पना बिना मानव के नहीं की जा सकती है क्योंकि समाज व्यक्तियों से मिलकर बना है और बिना मानव के न तो समाज का ही अस्तित्व होगा और न ही समुदाय अथवा सामुदायिक भावना का। कहने का तात्पर्य यह है कि व्यक्तियों का समूह समाज तथा समुदाय का प्रथम आवश्यक तत्व तथा प्रमुख विशेषता है। ग्रीन और सदरलैण्ड जैसे विद्वानों ने भी अपनी परिभाषाओं के माध्यम से स्पष्ट किया है कि समुदाय सामान्यतः व्यक्तियों का वह समूह है जो समीपस्थ छोटे क्षेत्र में निवास करतें हैं तथा सामान्य जीवन व्यतीत करते हैं।

3. सामुदायिक भावना अर्थात् ‘हम’ की भावना

किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में अथवा समुदाय के व्यक्तियों के मध्य सामुदायिक भावना अर्थात् ‘हम’ की भावना का होना भी अत्यन्त महत्वपूर्ण आवश्यकता तथा उसकी विशिष्टता को प्रदर्शित करता है। हम की भावना के अभाव में समुदाय के मध्य न तो एकता का भाव रहेगा और न ही उनमें आत्मीयता, सहयोग, भाईचारे आदि का उद्भव होगा क्योंकि वह ‘हम’ की भावना ही है जिससे किसी विशिष्ट क्षेत्र के निवासियों के बीच न केवल एकता, भाईचारे आदि के भाव को ही बल मिलता है अपितु उनमें विषम परिस्थितियों में एक-दूसरे का साथ देने तथा साथ मिलकर कार्य करने के भाव को भी प्रोत्साहन मिलता है। समुदाय में मुख्य रूप से सहयोगी सामाजिक संबंधों पर बल दिया जाता है।

4. सर्वमान्य नियम

प्रत्येक समुदाय के अपने कुछ सर्वमान्य नियम, रीति-रिवाज, प्रथाएं एवं रूढ़िया होती है जो उस समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति पर समान रूप से लागू होते हैं जिससे कि समुदाय के सदस्यों के व्यवहार पर आवश्यक नियंत्रण रखा जा सके। यह नियम उस समुदाय विशेष की विशिष्टता को तथा उसकी सामाजिक व्यवस्था को परिलक्षित करते हैं।

5. स्वतः उत्पत्ति

किसी भी समुदाय की उत्पत्ति स्वतः होती है क्योंकि समुदाय को कुछ लोगों द्वारा सोच-विचारकर अथवा नियोजित रूप से उत्पन्न नहीं किया जा सकता है। अतः स्वतः उत्पत्ति भी किसी भी समुदाय की अपनी एक मुख्य विशेषता है।

6. विशिष्ट नाम

किसी भी समुदाय का अपना एक विशिष्ट नाम होता है जो अन्य समुदायों के सापेक्ष उस निश्चित क्षेत्र के निवासियों अथवा उस समुदाय की पहचान का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही उसके सदस्यों के मध्य हम की भावना जागृत करने व उसे बनाये रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

7. स्थायित्व

किसी भी व्यक्तियों के समूह अथवा भीड़ आदि को समुदाय की संज्ञा नहीं दी जा सकती है क्योंकि समुदाय की प्रथम आवश्यकता व्यक्तियों के समूह के साथ ही उनका किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में एक साथ निवास करना भी होता है। स्पष्ट है कि प्रत्येक समुदाय एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में स्थायी रूप से रहता है। अतः स्थायित्व भी समुदाय की एक मुख्य विशेषता है।

8. मूर्तता (Concreteness)

किसी भी समुदाय को हम प्रत्यक्ष रूप से देख सकते हैं अर्थात् यह एक मूर्त समूह का भी प्रतिनिधित्व करता है जिन्हें हम किसी निश्चित भू-क्षेत्र पर व्यक्तियों के समूह के रूप में स्पष्ट रूप से देख सकते है। स्पष्ट है कि समुदाय की एक अन्य विशेषता उसका मूर्त स्वरूप भी है।

9. अनिवार्य सदस्यता

प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी समुदाय का सदस्य अवश्य होता है। उसे अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये किसी न किसी क्षेत्रीय समुदाय अथवा समूह में रहना ही पड़ता है। वह उस समुदाय में रहता है तथा उसके अन्य सदस्यों के साथ अंतःकिया करता है। जिससे उनके मध्य ‘हम’ के भाव के साथ ही उस समुदाय के साथ लगाव व अपनत्व का भाव भी पनपता है। अतः अनिवार्य सदस्यता भी समुदाय की एक अन्य विशेषता है।

10. समानता

प्रत्येक समुदाय में उसके सभी सदस्यों को समान अधिकार व दर्जा प्राप्त होता है। समुदाय का प्रत्येक सदस्य समान होता है। उन पर समुदाय के सभी नियम-कायदे भी समान रूप से लागू होते हैं। अतएव समुदाय की एक अन्य विशेषता समानता भी है।

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