# स्विस (स्विट्जरलैण्ड) संविधान की प्रमुख विशेषताएं | Switzerland Ke Samvidhan ki Pramukh Visheshata

स्विस संविधान की अनेक विशेषताएं उल्लेखनीय हैं, इनमें से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण दो विशेषताएं हैं-
A. बहुल कार्यपालिका (Plural Executive)
B. प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र (Direct Democracy)
बहुल कार्यपालिका और प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र के प्रयोग स्विट्जरलैण्ड में सफल रहे हैं। इसी आधार पर विचारक स्विट्जरलैण्ड को ‘राजनीतिक प्रयोगशाला‘ कहते हैं।
फेलिक्स बोन्जोर ने स्पष्ट कहा है कि “स्विट्जरलैण्ड राजनीति की प्रयोगशाला (Laboratory of Politics) है।”

स्विस (स्विट्जरलैण्ड) संविधान की प्रमुख विशेषताएं :

स्विस संविधान की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

1. निर्मित एवं लिखित संविधान

अमेरिका, भारत, सोवियत संघ आदि संघों की भाँति स्विस संघ का संविधान भी लिखित है। यद्यपि कोई भी संविधान पूर्ण रूप से लिखित अथवा अलिखित नहीं होता है। यद्यपि स्विट्जरलैण्ड एक छोटा-सा देश है, फिर भी स्विस संविधान में 123 अनुच्छेद हैं। इस संविधान के इतने विस्तृत होने के दो कारण हैं- प्रथम, संविधान में ऐसी बातों का उल्लेख है, जिनका कि संवैधानिक महत्त्व कुछ भी नहीं है। दूसरे, संविधान में केन्द्र व कैण्टनों की विधायिकीय और प्रशासकीय शक्तियों के विभाजन का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

लिखित संविधानों में भी अभिसमय या परम्पराएँ (Conventions) देखने को मिलती हैं। स्विट्जरलैण्ड भी इससे बचा हुआ नहीं है, यहाँ पर भी अनेक परम्पराओं का विकास हुआ है। उदाहरण के लिए, संविधान द्वारा कैण्टनों की नागरिकता प्राप्त करने के सम्बन्ध में विदेशियों के लिए नियम बनाने का अधिकार संघीय सरकार को ही है, परन्तु विभिन्न कैण्टनों ने एक सुदृढ़ परम्परा के अनुसार अपनी नागरिकता प्रदान करने के सम्बन्ध में स्वयं नियम बना रखे हैं। जब किसी विदेशी को कोई कैण्टन अपनी नागरिकता प्रदान कर देता है, तो वह स्विस नागरिक हो जाता है।

एक परम्परा के अनुसार फैडरल कौंसिल के 7 सदस्यों में से एक-एक सदस्य ज्यूरिच (Zurich) और बर्न (Berne) दो कैण्टनों से अवश्य निर्वाचित किये जाते हैं। (ये दोनों कैण्टनें प्राचीन व बड़ी हैं)। एक और सुदृढ़ परम्परा यह है कि फैडरल कौंसिल के उपाध्यक्ष को अगले वर्ष अध्यक्ष निर्वाचित कर लिया जाता है।

2. कठोर संविधान

संघीय शासन प्रणाली में संविधान कठोर ही होना चाहिए। स्विस संघ का संविधान कठोर ही है। स्विट्जरलैण्ड के संविधान में संशोधन का प्रस्ताव संघीय सरकार के अलावा जनता (कम-से-कम 50 हजार मतदाता) भी रख सकती है। ऐसा कोई भी संशोधन प्रस्ताव तभी स्वीकृत समझा जायेगा, जबकि (i) संघीय विधानमण्डल के दोनों सदन उसे स्वीकार कर लें, तत्पश्चात् (ii) लोक-निर्णय में स्विट्जरलैण्ड के समस्त नागरिकों को बहुमत और यहाँ की समस्त कैण्टनों का बहुमत उस प्रस्ताव को स्वीकार कर ले। स्विस संविधान में अब तक 57 संशोधन हो चुके हैं। इस सम्बन्ध में प्रो. हेयर ने कहा है कि “यद्यपि स्विस संविधान कठोर है, परन्तु यहाँ के नागरिक लचीले हैं।”

3. प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र

जर्चर ने ठीक कहा है कि “आधुनिक वर्षों में स्विट्जरलैण्ड और प्रजातन्त्र दोनों पर्यायवाची हो गये हैं।” ब्राइस का कहना है कि “वर्तमान लोकतन्त्रीय राज्यों में, जो वास्तविक लोकतन्त्र है, अध्ययन की दृष्टि से स्विट्जरलैण्ड का दावा सबसे बड़ा है।” स्विट्जरलैण्ड ही विश्व का एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ आज भी प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र देखा जा सकता है।

यहाँ प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र के तीन रूप हैं- (i) कुछ कैण्टनों (प्रान्तों या राज्यों) में विधानमण्डल ही नहीं है, जनता स्वयं एक स्थान पर एकत्रित होकर वह कार्य करती है, जो दूसरे देशों में निर्वाचित प्रतिनिधि करते हैं, (ii) लोक-निर्णय, और (iii) प्रस्तावाधिकार व उपक्रम। बड़े कैण्टनों, जहाँ विधानमण्डल हैं, वहाँ तथा केन्द्र के शासन में नागरिकों को लोक-निर्णय का प्रस्तावाधिकार प्राप्त है। लोक-निर्णय के द्वारा विधानमण्डल द्वारा पारित कानूनों पर नागरिकों के बहुमत की स्वीकृति आवश्यक है और प्रस्तावाधिकार के द्वारा नागरिकों को इच्छानुसार कानून बनवाने या संविधान में संशोधन के लिए प्रस्ताव रखने का अधिकार है।

स्विट्जरलैण्ड में विधानमण्डल और मतदाताओं द्वारा स्वीकृत कानूनों व संवैधानिक संशोधनों पर न्यायालयों को विचार करने का अधिकार नहीं है। दूसरे शब्दों में, स्विट्जरलैण्ड में अमेरिका या भारत की तरह ‘न्यायिक पुनर्विलोकन’ की व्यवस्था नहीं है। स्विस प्रजातन्त्र की उपर्युक्त विशेषताओं के कारण ही सीगफ्रीड ने कहा है, “यदि प्रजातन्त्र का आशय जनता का, जनता द्वारा शासन है, तो मैं नहीं समझता कि प्रजातन्त्र, जितना स्विट्जरलैण्ड में है, उससे भी बढ़कर कहीं हो सकता है।”

4. गणतन्त्रवाद

स्विस संविधान गणतन्त्रवादी है। यहाँ कोई भी पद या संस्था पैतृक नहीं है। शासन का कोई भी ऐसा पद नहीं है, जिस पर साधारण नागरिक नियुक्तया निर्वाचित न हो सके। न केवल संघीय संविधान गणतन्त्रात्मक है, वरन् कैण्टनों के संविधान भी गणतन्त्रवादी होते हैं। यदि किसी कैण्टन का संविधान गणतन्त्रीय नहीं है तो उसे संघीय न्यायालय द्वारा रद्द घोषित किया जा सकता है।

5. बहुल कार्यपालिका

स्विस कार्यपालिका भी विश्व की संवैधानिक प्रणालियों में अनोखी है। विश्व में एकल कार्यपालिका (Single Executive) के उदाहरण मिलते हैं। अमेरिका व ब्रिटेन में ऐसी ही कार्यपालिकाएँ हैं, जहाँ शासन की शक्तियाँ एक व्यक्ति में निहित हैं, परन्तु स्विट्जरलैण्ड में कार्यपालिका शक्तियाँ एक व्यक्ति में निहित न होकर 7 व्यक्तियों की एक समिति में निहित हैं, जिसे फेडरल कौंसिल कहा जाता है। कौंसिल में कोई भी एक व्यक्ति ऐसा नहीं है, जिसकी तुलना ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री या अमेरिकन राष्ट्रपति से की जा सके। स्विस कार्यपालिका में तो सातों का समान स्तर है व उनकी शक्तियाँ समान हैं, इसीलिए इसे बहुल कार्यपालिका कहा जाता है।

6. संसदीय और अध्यक्षीय प्रणाली का मिश्रण

स्विट्जरलैण्ड में न तो ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली को अपनाया गया है और न अमेरिका की अध्यक्षीय प्रणाली को। इन दोनों प्रणालियों के गुणों को लेते हुए और दोषों को दूर करते हुए एक नई शासन व्यवस्था को जन्म दिया गया है, जिसमें दोनों का समन्वय किया गया है।

ब्रिटेन की संसदीय कार्यपालिका की तरह, स्विट्जरलैण्ड में कार्यपालिका के सदस्य- (i) विधानमण्डल की कार्यवाहियों में भाग लेते हैं, (ii) विधेयक व अन्य प्रस्ताव रखते हैं, (iii) विधानमण्डल के सदस्यों के प्रश्नों के उत्तर देते हैं, (iv) विधानमण्डल के प्रति उत्तरदायी होते हैं। दूसरी ओर अमेरिकन कार्यपालिका की तरह- (i) स्विस कार्यपालिका के सदस्य विधानमण्डल के सदस्य नहीं होते, (ii) सदन में मतदान में भी वे भाग नहीं ले सकते, (iii) अमेरिकन राष्ट्रपति की तरह स्विस कार्यपालिका का कार्यकाल भी 4 वर्ष के लिए निश्चित है। इस प्रकार स्विस कार्यपालिका में उत्तरदायित्व और  व्यक्तित्व दोनों गुणों का समावेश है।

7. संघात्मक शासन व्यवस्था

स्विट्जरलैण्ड एक संघात्मक राज्य है। यद्यपि संविधान में ‘संघ’ शब्द का प्रयोग न होकर ‘परिसंघ’ (Confederation) शब्द का प्रयोग किया गया है, फिर भी स्विस व्यवस्था पूर्ण संघीय है। स्विट्जरलैण्ड के संघ में 25 कैण्टन (राज्य) सम्मिलित हैं, जिनमें 19 पूर्ण कैण्टन हैं और 6 अर्द्ध-कैण्टन हैं। स्विस संघीय व्यवस्था में संघात्मक शासन के सभी लक्षण मौजदू हैं, जैसे- (i) केन्द्र और प्रान्तीय शासन की अलग-अलग व्यवस्था, (ii) केन्द्र और कैण्टनों में शक्तियों का वितरण, (iii) लिखित व कठोर संविधान, (iv) कैण्टनों या राज्यों के पृथक् संविधान, (v) केन्द्र में द्विसदनात्मक विधानमण्डल और द्वितीय सदन में कैण्टनों को समान प्रतिनिधित्व, (vi) संघीय न्यायपालिका। यद्यपि न्यायपालिका को वह महत्ता प्राप्त नहीं है, जो कि अमेरिका में न्यायपालिका को प्राप्त है।

8. संघीय न्यायालय की सीमित शक्तियाँ

स्विट्जरलैण्ड में संघीय न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय को ‘संघीय न्यायाधिकरण‘ (Federal Tribunal) कहते हैं, परन्तु इसको वे शक्तियाँ व महत्ता प्राप्त नहीं, जो अमेरिकन या भारतीय संघ में सर्वोच्च न्यायालय को प्राप्त हैं। स्विस संघीय न्यायालय संविधान का संरक्षक नहीं है, उसे संविधान की व्याख्या करने या संघीय विधानमण्डल द्वारा पारित कानूनों को ‘न्यायिक पुनर्विलोकन’ के अन्तर्गत अवैध घोषित करने का अधिकार नहीं है। स्विट्जरलैण्ड में संविधान की व्याख्या का अधिकार संघीय विधानमण्डल को ही है। संघीय न्यायालय केवल कैण्टनों के विधानमण्डल द्वारा पारित कानूनों को ही अवैध घोषित कर सकता है। यह भी उल्लेखनीय है कि स्विट्जरलैण्ड में संघीय न्यायालय के न्यायाधीशों का निर्वाचन भी संघीय विधानमण्डल ही करता है।

9. नागरिकों के अधिकार

अमेरिका और भारत आदि राज्यों के संविधान की भाँति स्विट्जरलैण्ड के संविधान में नागरिकों को कोई अधिकार-पत्र (Bill of Rigths) नहीं है, परन्तु संविधान के प्रथम अध्याय में इधर-उधर अनेक अनुच्छेदों में नागरिकों के अधिकार फैले हुए हैं। कुछ मुख्य अधिकार इस प्रकार हैं-

(i) “स्विट्जरलैण्ड के सभी नागरिक कानून की दृष्टि में समान हैं। पद, जाति अथवा कुटुम्ब के आधार पर किसी को विशेषाधिकार प्राप्त नहीं हैं।” (अनु. 4)
(ii) “कैण्टन प्रारम्भिक शिक्षा का प्रबन्ध करेंगे, जो व्यापक होगी। प्रारम्भिक शिक्षा अनिवार्य और सरकारी स्कूलों में मुफ्त दी जायेगी। सभी धर्मावलम्बियों के लिए सरकारी स्कूलों में प्रवेश हो सकेगा। यदि कोई कैण्टन इन बातों का पालन नहीं करती तो उस कैण्टन के विरुद्ध संघ की सरकार उचित कार्यवाही करेगी।” (अनु. 27)
(iii) “समस्त संघ के अन्तर्गत व्यापार व उद्योग की स्वतन्त्रता है।” (अनु. 31)
(iv) “किसी स्विस नागरिक को संघ अथवा जन्म से कैण्टन की सीमा के बाहर निर्वासित नहीं किया जा सकेगा।” (अनु. 44)
(v) “प्रत्येक स्विस नागरिक को जन्म आदि के प्रमाण-पत्र पेश करने पर स्विट्जरलैण्ड के किसी क्षेत्र में निवास करने का अधिकार होगा।” (अनु. 45)
(vi) “अन्तःकरण की स्वतन्त्रता का हनन नहीं होगा। किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी धार्मिक समुदाय का सदस्य नहीं बनाया जायेगा। धर्म या मत के आधार पर सिविल और राजनीतिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जायेगा।” (अनु. 49)
(vii) “प्रेस की स्वतन्त्रता की गारण्टी की जाती है, परन्तु कैण्टन उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक कार्यवाही कर सकते हैं।” (अनु. 55)
(viii) “नागरिकों को समुदाय अथवा संस्थाएँ बनाने की स्वतन्त्रता है, परन्तु इनके उद्देश्य व साधन न तो अवैधानिक हों और न राज्य के लिए अहितकर ही। कैण्टन इसके दुरुपयोग को रोकेंगे।” (अनु. 56)
(ix) “याचना (Petition) करने के अधिकार की गारण्टी की जाती है।” (अनु. 57)
(x) “प्रत्येक कैण्टन दूसरे कैण्टन के नागरिकों के साथ वैसा ही व्यवहार करेगा, जैसा कि वह अपने नागरिकों के साथ करता है।” (अनु. 59)
(xi) “राजनीतिक अपराधों के लिए प्राण दण्ड नहीं दिया जायेगा।” (अनु. 60)

10. उदार संविधान

स्विस संविधान की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह व्यक्ति की स्वतन्त्रता और अधिकारों को महत्त्व देता है। (ऊपर हम नागरिकों के अधिकारों व स्वतन्त्रताओं का उल्लेख कर आये हैं) अनुच्छेद 61 में न्याय सम्बन्धी व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लेख है और अनुच्छेद 66 में राजनीतिक अधिकारों को संघीय संरक्षण प्रदान किया गया है।

संविधान के उदार होने के दो प्रमुख प्रमाण और भी हैं प्रथम तो, स्विट्जरलैण्ड के संविधान द्वारा स्थायी सेना के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। दूसरे, वह अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में स्थायी रूप से तटस्थता की नीति को मानता है। इन सब कारणों से कहा जा सकता है कि स्विस राजनीतिक प्रणाली का महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त उसका उदारवाद है।

11. संघीय विधानमण्डल के दोनों सदनों के समान अधिकार

स्विट्जरलैण्ड की फैडरल एसेम्बली (केन्द्रीय विधानमण्डल) में दो सदन हैं। राष्ट्रीय-परिषद् (The National Council) प्रथम सदन है और राज्य-परिषद् (The Council of States) द्वितीय सदन है, जो कि संघीय इकाइयों (कैण्टनों) का प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक पूर्ण कैण्टन से दो और अर्द्ध-कैण्टन से एक सदस्य निर्वाचित किया जाता है। स्विट्जरलैण्ड में 19 पूर्ण तथा 6 अर्द्ध-कैण्टन हैं। इस प्रकार राज्य-परिषद् में कुल 44(19×2=38+6=44) सदस्य हैं।

राष्ट्रीय-परिषद् स्विस जनता के सामान्य हितों का प्रतिनिधित्व करती है। स्विस संविधान की यह उल्लेखनीय विशेषता है कि वह उक्त एसेम्बली के सदनों को समान अधिकार प्रदान करता है। कोई भी विधेयक (धन-विधेयक भी) किसी भी सदन में प्रारम्भ किया जा सकता है, उसके पारित होने के लिए दोनों सदनों की स्वीकृति आवश्यक होती है। संविधान में इसका उल्लेख नहीं है कि यदि कभी दोनों सदनों में मतभेद हो तो उसे कैसे दूर किया जायेगा।

12. गतिशील संविधान

स्विट्जरलैण्ड का संविधान लिखित होते हुए भी गतिशील रहा है। समय की माँग को पूरा करने के लिए समय-समय पर स्विस संविधान में संशोधन होते रहे हैं।

13. कैण्टनों के पृथक संविधान

जैसे अमेरिकन संघ में इकाइयों के अपने निजी संविधान हैं, वैसे ही स्विस कैण्टनों के भी अपने पृथक्-पृथक् संविधान हैं, परन्तु इस सम्बन्ध में कुछ शर्ते निश्चित की गई हैं, ये निम्नवत् हैं-
(क) कैण्टनों के संविधान संघीय संविधान के विरुद्ध नहीं होने चाहिए।
(ख) संघीय संविधान की भाँति कैण्टनों के संविधान भी गणतन्त्रीय होने आवश्यक हैं।
(ग) कैण्टनों का संविधान उसकी जनता ने स्वीकृत कर लिया हो और उसमें यह भी उपलब्ध हो कि मतदाताओं का बहुमत चाहे, तो उसमें संशोधन कर सकता है।

14. कैण्टनों के विधानमण्डल व संघीय विधानमण्डल दोनों की सदस्यता साथ-साथ

स्विस संविधान की एक अनोखी विशेषता यह है कि कैण्टनों के विधानमण्डल के सदस्य फैडरल असेम्बली के सदस्य भी निर्वाचित हो सकते हैं और दोनों पदों पर कार्य कर सकते हैं, परन्तु कोई भी नागरिक एक साथ फैडरल एसेम्बली के दोनों सदनों का सदस्य नहीं रह सकता।

15. शक्तियों का वितरण

स्विस संविधान में शक्तियों का वितरण अमेरिकन आधार पर ही किया गया है। संविधान में कुछ विषय स्पष्ट रूप से केन्द्र को दिये गये हैं, कुछ विषय ऐसे भी हैं, जिन पर केन्द्र व कैण्टन दोनों को समवर्ती अधिकार क्षेत्र प्राप्त हैं। अवशिष्ट शक्तियाँ अमेरिका की भाँति स्विट्जरलैण्ड में भी इकाइयों के पास सुरक्षित हैं। विधायी शक्तियों के अतिरिक्त, केन्द्र व कैण्टनों में प्रशासनिक शक्तियों का भी विभाजन किया गया है। किसी कैण्टन में शान्ति भंग होने की स्थिति में केन्द्र हस्तक्षेप कर सकता है और वह कैण्टन के विधानमण्डल को निलम्बित भी कर सकता है।

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